Article 243 ZK the Indian Constitution
jp Singh
2025-07-04 15:29:27
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भारतीय संविधान का अनुच्छेद 243ZK
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 243ZK
अनुच्छेद 243ZK भारतीय संविधान के भाग IX-B(सहकारी समितियाँ) में आता है। यह सहकारी समितियों के निर्वाचन(Election of members of board) से संबंधित है। यह प्रावधान सहकारी समितियों की संचालक समिति के सदस्यों के निर्वाचन की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है और यह सुनिश्चित करता है कि निर्वाचन स्वतंत्र, निष्पक्ष, और समयबद्ध हों। यह अनुच्छेद 97वें संशोधन(2011) के द्वारा जोड़ा गया, जिसने सहकारी समितियों को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया।
"(1) सहकारी समितियों की संचालक समिति के निर्वाचन का अधीक्षण, निर्देशन, और नियंत्रण, अनुच्छेद 243K के अधीन गठित राज्य निर्वाचन आयोग में निहित होगा।
(2) इस संविधान के उपबंधों और संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन, सहकारी समितियों की संचालक समिति के निर्वाचन के लिए उपबंध राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई विधि द्वारा किए जाएँगे।"
उद्देश्य: अनुच्छेद 243ZK सहकारी समितियों की संचालक समिति के निर्वाचन को राज्य निर्वाचन आयोग के नियंत्रण में रखता है ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचन सुनिश्चित हों। यह राज्य विधानमंडल को निर्वाचन प्रक्रिया के लिए नियम बनाने का अधिकार देता है। इसका लक्ष्य सहकारी समितियों में लोकतांत्रिक प्रबंधन, निष्पक्षता, और संघीय ढांचे में स्वायत्तता सुनिश्चित करना है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: संवैधानिक ढांचा: यह प्रावधान 97वें संशोधन(2011) द्वारा जोड़ा गया, जो अनुच्छेद 243ZA(नगरपालिकाओं के निर्वाचन) और अनुच्छेद 243K(पंचायतों के निर्वाचन) से प्रेरित है। यह सहकारी समितियों में लोकतांत्रिक और निष्पक्ष निर्वाचन प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया। भारतीय संदर्भ: 2011 से पहले, सहकारी समितियों के निर्वाचन में अनियमितताएँ और असमानताएँ थीं। इस संशोधन ने इसे संवैधानिक और व्यवस्थित बनाया। प्रासंगिकता: यह प्रावधान सहकारी समितियों में लोकतांत्रिक शासन की अखंडता को बढ़ावा देता है।
अनुच्छेद 243ZK के प्रमुख तत्व
खंड(1): राज्य निर्वाचन आयोग: सहकारी समितियों की संचालक समिति के निर्वाचन का अधीक्षण, निर्देशन, और नियंत्रण राज्य निर्वाचन आयोग में निहित होगा, जो अनुच्छेद 243K के तहत गठित है। यह आयोग पंचायतों, नगरपालिकाओं, और सहकारी समितियों के निर्वाचनों की देखरेख करता है। उदाहरण: 2025 में, महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग ने एक दुग्ध सहकारी समिति के लिए निर्वाचन आयोजित किया।
खंड(2): राज्य विधानमंडल की भूमिका: सहकारी समितियों के निर्वाचन के लिए नियम राज्य विधानमंडल द्वारा बनाई गई विधि द्वारा निर्धारित होंगे। यह संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि और संविधान के उपबंधों के अधीन होगा। उदाहरण: 2025 में, उत्तर प्रदेश में सहकारी समितियों के निर्वाचन के लिए विशेष नियम बनाए गए।
महत्व: लोकतांत्रिक निष्पक्षता: स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचन। राज्य निर्वाचन आयोग: केंद्रीकृत नियंत्रण। सहकारी शासन: लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व। संघीय ढांचा: केंद्र, राज्य, और सहकारी समितियों में समन्वय।
प्रमुख विशेषताएँ: राज्य निर्वाचन आयोग: निर्वाचन नियंत्रण। राज्य विधानमंडल: नियम निर्धारण। निष्पक्षता: लोकतांत्रिक प्रक्रिया। सहकारी शासन: प्रतिनिधित्व।
ऐतिहासिक उदाहरण: 2011 के बाद: सहकारी समितियों के लिए राज्य निर्वाचन आयोगों द्वारा निर्वाचन शुरू। 2010 के दशक: निर्वाचनों में पारदर्शिता और नियमितता बढ़ी। 2025 स्थिति: डिजिटल युग में निर्वाचन प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन निगरानी।
चुनौतियाँ और विवाद: 97वां संशोधन पर विवाद: 2021 में, सुप्रीम कोर्ट ने भाग IX-B के कुछ हिस्सों को असंवैधानिक घोषित किया, क्योंकि सहकारी समितियाँ राज्य सूची(सातवीं अनुसूची, प्रविष्टि 32) का विषय हैं। अनुच्छेद 243ZK की वैधता प्रभावित हुई, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग की भूमिका बरकरार। निर्वाचन में देरी: कुछ राज्यों में समय पर निर्वाचन नहीं।आयोग की स्वायत्तता: राज्य सरकारों के प्रभाव के आरोप।न्यायिक समीक्षा: निर्वावाचन प्रक्रिया की वैधता पर कोर्ट की जाँच।
संबंधित प्रावधान: अनुच्छेद 243K: पंचायतों और सहकारी समितियों के लिए निर्वाचन आयोग। अनुच्छेद 243ZA: नगरपालिकाओं के निर्वाचन। अनुच्छेद 243ZJ: संचालक समिति की संरचना।
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jp Singh
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